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Bharat Tiwari Encounter Case: मृतक का भाई बताकर बयान देने वाले सिपाही आशीष कुमार तिवारी पर गिरी गाज, निलंबित

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भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में मोतिहारी पुलिस लाइन में तैनात सिपाही आशीष कुमार तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच के बाद पूर्वी चंपारण एसपी ने कार्रवाई की है।

मोतिहारी/आलम की खबर:भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी पुलिस लाइन में तैनात सिपाही आशीश कुमार तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। आरोप है कि सिपाही ने खुद को मृतक भरत तिवारी का भाई बताते हुए सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर कई बयान दिए थे।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और जांच शुरू कराई। पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर सिपाही आशीष कुमार तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

पुलिस विभाग का कहना है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी सेवा नियमों के तहत काम करता है और उसे सार्वजनिक बयान देने से पहले विभागीय आचरण नियमों का पालन करना होता है। विभाग के अनुसार, सिपाही द्वारा दिए गए बयान पुलिस सेवा की मर्यादा और अनुशासन के अनुरूप नहीं पाए गए।

जांच के दौरान सिपाही से पूरे मामले को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। विभाग की ओर से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।

बताया जा रहा है कि आशीष कुमार तिवारी ने भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया और सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। इस दौरान उन्होंने खुद को भरत तिवारी का भाई बताया था। उनके कई बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे, जिसके बाद पुलिस विभाग की नजर इस मामले पर गई।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पहले से ही चर्चा में बना हुआ है। घटना को लेकर अलग-अलग स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। इसी बीच पुलिस विभाग के एक कर्मी की ओर से सार्वजनिक बयान देने का मामला सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई की गई है।

पूर्वी चंपारण पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि पुलिस विभाग में अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी पुलिसकर्मी द्वारा सेवा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने साफ किया है कि सरकारी पद पर रहते हुए सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल होने और बयान देने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है।

सूत्रों के अनुसार, आशीष कुमार तिवारी की पिछली तैनाती के दौरान भी कुछ मामलों को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा हुई थी। जांच के दौरान इन पहलुओं को भी शामिल किया गया। हालांकि वर्तमान कार्रवाई मुख्य रूप से भरत तिवारी मामले में दिए गए सार्वजनिक बयानों और सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन को लेकर की गई है।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। विभाग ने संकेत दिया है कि अनुशासनहीनता के मामलों में किसी भी स्तर के कर्मचारी को राहत नहीं दी जाएगी। वहीं इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी नजर रखी जा रही है।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आगे की घटनाओं पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं। फिलहाल मोतिहारी पुलिस की यह कार्रवाई विभागीय अनुशासन को लेकर एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।

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भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सिपाही आशीष कुमार तिवारी पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर पुलिस विभाग में अनुशासन और सेवा नियमों की अहमियत को सामने ला दिया है। सरकारी सेवा में रहते हुए किसी भी कर्मचारी के लिए निर्धारित आचरण नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

हालांकि इस पूरे मामले में आगे की स्थिति जांच और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही स्पष्ट होगी। पुलिस विभाग की कार्रवाई यह बताती है कि विभाग अपने कर्मचारियों के सार्वजनिक व्यवहार और जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर है।

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